भविष्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता(A.I)Future with artificial intelligence

कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(A.I) मशीनी भाषा मे इसको कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कुछ और अलग भाग है, अगर साधारण भाषा मे कहा जाए तो, कृत्रिम बुद्धिमता वह है जो अपनी बुद्धि का प्रयोग खुद कर सकता है किसी कार्य को करने के लिए। पहला A.I मशीन कि 1956 के दौरान शुरू किया गया जो काफि साधारण था आज के मुकबले। उस वक्त इसकी कलपना भी नही की जा सकती थी कि भविष्य मे क्या होने वाला है। 1985 के बाद आर्टिफिशियल के संबध मे कुछ फिल्मे बनने लगी और लगातार गहरा अध्यन किया गया।

अगर हम उसकि इतिहास पर नजर डाले तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्राचिन इतिहास में शुरू हुआ, कलाकृतियों के मिथकों, कहानियों और अफवाहों के साथ मास्टर कारीगरों द्वारा खुफिया या चेतना के साथ संपन्न हुआ।  आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बीज शास्त्रीय दार्शनिकों द्वारा लगाए गए थे जिन्होंने मानव सोच की प्रक्रिया को प्रतीकों के यांत्रिक हेरफेर के रूप में वर्णित करने का प्रयास किया था। 

इस कार्य का समापन 1940 के दशक प्रोग्रामेबल डिजिटल कंप्यूटर के आविष्कार के साथ हुआ, जो कि गणितीय तर्क के अमूर्त सार पर आधारित एक मशीन थी।  इस उपकरण और इसके पीछे के विचारों ने एक मुट्ठी भर वैज्ञानिकों को इलेक्ट्रॉनिक मस्तिष्क के निर्माण की संभावना पर गंभीरता से चर्चा शुरू करने और सोचने के लिए प्रेरित किया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट, को तीन अलग-अलग प्रकार की प्रणालियों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
  • विश्लेषणात्मक
  • मानव-प्रेरित
  • मानवीकृत कृत्रिम बुद्धि


विश्लेषणात्मक एआई में केवल संज्ञानात्मक बुद्धि के अनुरूप विशेष इंटेलिजेटं ध्यान दिया जाता है।भविष्य के निर्णयों को सूचित करने के लिए अतीत के अनुभव के आधार पर।
   दुनिया का एक संज्ञानात्मक प्रतिनिधित्व पैदा करना और सीखने का उपयोग करना होता है।  मानव-प्रेरित एआई में संज्ञानात्मक और भावनात्मक बुद्धि से तत्व हैं;  मानवीय भावनाओं को समझना, संज्ञानात्मक तत्वों के अलावा, और उनके निर्णय लेने में उन पर विचार करने छमता होना।  मानवकृत एआई सभी प्रकार की दक्षताओं (यानी, संज्ञानात्मक, भावनात्मक और सामाजिक बुद्धिमत्ता) की विशेषताओं को दिखाता है, आत्म-जागरूक होने में सक्षम है और बातचीत में आत्म-जागरूक है।

इसकि शरूआत के बाद कई परेशानियों का सामना करना पड़ा तकनिकी त्रुटी कि तरह परन्तु आज के दौर उसे पहले से बेहतर बनाया जा रहा है।ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंट बनाने का मकसद था मनुष्य के जीवन को किस तरह से बेहतर और आसान बनाया जा सकता है और एक ऐसी दुनीया कि कलपना कि जा रही थी जो त्रुटी से परे हो ।
  पर इसे बनाने बाद यह शंका जताया जा रहा है कि भविष्य मे मनुष्य पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा और उनके बेरोजगारी को बढ़ावा देगा।

21 वीं सदी मे यह एक माध्यम वर्ग मे अंकित करते है इसकि क्षमता पहले के मुकाबले बेहतर हुई है। और यह अभी बड़े कंपनियो और अंतरिक्ष के क्षेत्र मे इसका प्रयोग हो रहा है अब यह अपनी बुद्धि का पुर्ण प्रयोग खुद नही कर सकता पर आने वाले वक्त मे शायद यह मुनकिन हो। अभी कि तकनिक मे जैसे कुछ ऑटोमोबाइल कंपनीयो मे लगे हुए मशीन जो बेहतर तकनिकी छमताओ कि मद्द से कोई भी कार्य को आसानी से बिना गलती किए कर सकता है । कुछ तकनीक एसे है जो काफि आधुनीक है जो हम दिन प्रतिदिन अपने प्रयोग मे लाते है जैसे मोबाइल मे लगे हुए फेस सुरक्षा तकनिक जिसमे चहरे को मोबाइल के पास लाने के बाद मोबाइल का लाॅक खुलता है।

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