मोबाइल तकनीक और उसकी शुरूआत(mobile technology history )

फोन तकनीक की शुरूआत 1800ई से ही हो चुका था। उस वक्त यह इतनी प्रचलित तो नही थी पर लोग यांत्रिकी उपकरण का उपयोग करते थे एक दुसरे से बात करने के लिए। जिसमे पाइप से धवनी को संचार किया जाता था, उसके बाद दो धातुओ के बीच तारो को जोड़ कर इसका उपयोग होने लगा। 1900 ई के शुरूआत मे यह दवा किया गया कि एसा फोन लाया जाएगा जो तार रहित होगा। उस वक्त लोग इसके बारे मे सोच भी नही सकते थे। पर एसा हुआ और आज हम उसका उपयोग कर रहे है बल्कि उस्से बेहतर फोन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। और यह आने वाले वक्त मे और भी बेहतर होगा।

1917 में, फिनिश आविष्कारक एरिक टाइगरस्टेड ने “पॉकेट-साइज़ फोल्डिंग टेलीफ़ोन के साथ एक छोटा और  पतला कार्बन माइक्रोफोन” के लिए एक पेटेंट दायर किया।  सेलुलर फोन के शुरुआती में जहाजों और ट्रेनों से एनालॉग रेडियो संचार को शामिल किया गया। उसके बाद समय बितता गया और  द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सही मायने में पोर्टेबल टेलीफोन उपकरण बनाने की दौड़ शुरू हुई, जिसमें कई देशों इस पहल पर हिस्सा लिया।  मोबाइल टेलीफोनी में अग्रिमों को क्रमिक को “पीढ़ियों” में पता लगाया गया है, जो कि शुरुआती ज़ेरोथ-जनरेशन शुन्य जी (0G) सेवाओं, जैसे बेल सिस्टम की मोबाइल टेलीफोन सेवा और इसके उत्तराधिकारी, उन्नत मोबाइल टेलीफ़ोन सेवा से शुरू होता है।  शुन्य(0) जी सिस्टम सेलुलर से भी नीचे थे, कुछ एक साथ कॉल का समर्थन करते थे, और बहुत महंगे थे। क्योकि इसकि शुरूआत अभी अभी हुई थी।

जपान मे 1973 में जॉन एफ। मिशेल और मोटोरोला के मार्टिन कूपर द्वारा पहले हैंडहेल्ड सेलुलर मोबाइल फोन का प्रदर्शन किया गया था, जिसमें हैंडसेट का वजन 2 किलोग्राम (4.4 पाउंड) था इसका वजन काफि ज्यादा था आज के फोन के मुकाबले। उसके बाद पहला वाणिज्यिक स्वचालित सेलुलर नेटवर्क (1G) एनालॉग जापान में निप्पॉन टेलीग्राफ और टेलीफोन द्वारा 1979 में लॉन्च किया गया। इसके बाद 1981 में डेनमार्क, फिनलैंड, नॉर्वे और स्वीडन में नॉर्डिक मोबाइल टेलीफोन (NMT) प्रणाली का एक साथ लॉन्च किया गया था। 1980 के दशक के मध्य में कई अन्य देशों ने भी इसका अनुसरण करने लगे। ये फोन पहली पीढ़ी (1G) सिस्टम कहीं अधिक युगपत कॉल का समर्थन कर सकते थे लेकिन फिर भी एनालॉग सेलुलर तकनीक का उपयोग करते थे।  मोटोरोला 1983 में, DynaTAC 8000x पहला व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हैंडहेल्ड मोबाइल फोन था जो प्रचलित भी हुआ।

New generation phone

भारत मे इसकी शुरूआतः

भारत में दूरसंचार टेलीग्राफ पेपर कंपनी की शुरुआत के साथ शुरू हुआ था। कहा जाता है भारतीय डाक और दूरसंचार क्षेत्र दुनिया के सबसे पुराने क्षेत्रों में से एक थी। 1850 में, कलकत्ता और डायमंड हार्बर के बीच पहली प्रायोगिक इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ लाइन शुरू की गई थी।  1851 में, इसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के उपयोग के लिए खोला गया था उस वक्त अंग्रेज  बातचित के लिए उपयोग मे लाते थे।  उस समय डाक और तार विभाग ने लोक निर्माण विभाग के एक छोटे से हिस्से पर कब्जा कर लिया था।

उसके बाद करीब 4,000 मील (6,400 किलोमीटर) की टेलीग्राफ लाइनों का निर्माण नवंबर 1853 में शुरू हुआ था। यह उत्तर में कोलकाता से(तत्कालीन कलकत्ता) उसके बाद आगरा, मुंबई ( बॉम्बे) सिंधवा घाट माध्यम से जुड़े थे; और दक्षिण में चेन्नई (तब मद्रास); उसके बाद बेंगलूर।  भारत में टेलीग्राफ और टेलीफोन का नेतृत्व करने वाले विलियम ओ’  सुहागेसी, लोक निर्माण विभाग मे कार्य करते थे, और इस अवधि में दूरसंचार के विकास की दिशा में लंबे समय तक काम किया। उसके बाद  एक अलग विभाग 1854 में खोला गया था जो जनता के लिए टेलीग्राफ की सुविधा खोली गई थी।

लगभग 1880 में, दो टेलीफोन कंपनियों अर्थात् ओरिएंटल टेलीफोन कंपनी लिमिटेड और द एंग्लो-इंडियन टेलीफोन कंपनी लिमिटेड ने भारत में टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित करने के लिए भारत सरकार से संपर्क किया था।  परन्तु इसे इनकार कर दिया गया और इस आधार पर अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था कि टेलीफोनों की स्थापना एक सरकारी एकाधिकार था और सरकार स्वयं कार्य करेगी। उसके बाद 1881 में, उस सरकार ने बाद में अपने पहले के फैसले को पलट दिया और इंग्लैंड की ओरिएंटल टेलीफोन कंपनी लिमिटेड को कलकत्ता, बॉम्बे, मद्रास और अहमदाबाद में टेलीफोन एक्सचेंज खोलने के लिए एक लाइसेंस दिया था और देश में पहली औपचारिक टेलीफोन सेवा स्थापित की गई।  28 जनवरी 1882 को, भारत के काउंसिल के सदस्य मेजर ई बारिंग ने कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में टेलीफोन एक्सचेंज खोलने की घोषणा की।  कलकत्ता में “सेंट्रल एक्सचेंज” नाम के एक्सचेंज के शुरुआती चरण में कुल 93 ग्राहक थे इस तरह से भारत मे सुचना संचरण कि शुरूआत हुई।

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