सुपरकंप्युटर क्या है? और उसका उपयोग क्यों और कहां होता है?

सुपरकंप्युटर क्या है?

सुपरकंप्युटर समान्य कंप्युटर कि तुलना मे अधिक अग्रिम होता है लगभग 100 गुणा ज्यादा, ज्यादातर सुपरकंप्युटर का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, अंतरिक्ष आदि के क्षेत्र मे होता है। इस तरह के कंप्युटर मे अधिकतम लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग होता है, क्योकि यह ऑपरेटिंग  सिस्टम ज्यादा सुरक्षित माना जाता है दुसरे ऑपरेटिंग सिस्टम कि तुलना मे; दुनया मे सबसे तेज 450 से अधिक सुपर कंप्युटर लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग करते है और ज्यातर देश जैसे: अमेरिका, चिन, जपान  आदि, इसे हर दिन बेहतर बनाने कि कोशिश मे जुटे है। जिसमे अहम भुमिका अमेरिका कि है इसे एक अग्रणी रूप मे आगे ले जाने कि।

Super computer

इतिहासः

सुपरकंप्युटर कि दुनया मे पहला कदम अमेरिका का ही रहा है।1960 में स्पेरी रैंड ने लिवरमोर एटॉमिक रिसर्च कंप्यूटर (LARC) को बनाया गया, जिसे आज यूएस नेवी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर का पहला सुपर कंप्यूटर कहा जाता है।  यह अभी भी नई उभरती हुई डिस्क ड्राइव तकनीक का उपयोग न कर उच्च गति वाली ड्रम मेमोरी का उपयोग किया करते है।आईबीएम 7030 को लॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी के लिए आईबीएम द्वारा बनाया गया था, जिसने 1955 में जो कंप्यूटर मौजुद थे उनकी तुलना में 100 गुना तेज कंप्यूटर का अनुरोध किया था।  आईबीएम द्वारा निर्माण किया गया 7030 में ट्रांजिस्टर, मैग्नेटिक कोर मेमोरी, पाइलेटेड निर्देश, प्रीमेच्योर डेटा को मेमोरी कंट्रोलर के माध्यम से इस्तेमाल किया गया था और इसमें रैंडम एक्सेस डिस्क ड्राइव को भी शामिल किया गया।  आईबीएम 7030 लगभग 1961 में पूरा हुआ था और प्रदर्शन में सौ गुना वृद्धि की चुनौती को पूरा नहीं करने के बावजूद भी, इसे लॉस अलामोस नेशनल लेबोरेटरी द्वारा खरीदा गया था।
     भारत मे सुपरकंप्युटर को विकसित करने का कर्यक्रम लगभग 1980ई मे शुरू किया गया जो दुसरे देशो कि तुलना मे यह काफि देर से शुरू हुआ । और लगभग 8 साल बाद 1988 मे दिल्ली को सॉफ्टवेयर के लिए चुना गया बैंगलोर को हार्डवेयर और पुणे को फर्मवेयर। भारत का पहला सुपरकंप्युटर परम 8000 है जो Center for Development of Advanced Computing  के नाम से जाना जाता है और जिसका  संक्षिप्त रूप(C-DAC) है।
      भारत सरकार द्वारा 400 करोड़ की मंजुरी दी गई 2017 मे सुपर कंप्युटर बनाने के लिए जो लगभग 10 Peta flops होने का अनुमान लगाया गया, और यह कंप्युटर 2018 मे बन कर तैयार हुआ जो करीब 6.0 peta flops है जिसका नाम Pratyush है और अभी यह भारत का सबसे तेज सुपरकंप्युटर है।

उपयोगः

सुपरकंप्युटर का कंप्युटर विज्ञान के क्षेत्र मे भी एक महत्वपुर्ण भुमिका अदा करता है, जिसमे जलवायु अनुसंधान, मौसम पुर्वअनुमान, तेल और गैसो कि खोज आदि शामिल है। सुपरकंप्युटर का लक्ष्य डिजिटर क्षेत्र मे क्रांति लाना लोगो के जीवन को आसान बनाना और से डेटा का आदान प्रदान करने मे एक अहम भुमीका होता है। यह अपनी व्यक्तिगत प्रसंस्करण इकाई बना सकता है, और हम इसे बहुत साधारण समझते परन्तु यह असाधरण कार्य ज्यादा करता है जिसे एक आम इंसान को करने मे ज्यादा समय लगता है। जिसमे किसी भी तरह का गड़ना या किसी भी तरह का अनुमान हो यह हमारे सोच से भी तेजी से कर सकता है, हलांकि यह इंनसानो के मद्द के बिना नही कर सकता परन्तु आने वाले समय मे शायद यह भी संभव हो जाए। अमेरीका प्रत्येक दिन, डीओईई के सुपर कंप्यूटरों का उपयोग मूलभूत वैज्ञानिक प्रश्नों का पता लगाने और उनके देश की कुछ सबसे जटिल चुनौतियों का समाधान करने के लिए करता  है।

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